फ्रांस
के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पिछले हफ्ते पहले विश्व युद्ध की 100वीं
वर्षगाँठ पर हुए एक समारोह में कहा, राष्ट्रवाद दुनिया के लिए खतरा है। राष्ट्रवाद
और देशभक्ति एक-दूसरे के विरोधी हैं। उन्होंने कहा, यह कहना कि मेरे हित सबसे आगे
हैं दूसरे भाड़ में जाएं, इंसानियत की मूल अवधारणा के खिलाफ है। यूरोप और पश्चिम
एशिया से पहले विश्व युद्ध के बादल पूरी तरह कभी छँटे नहीं हैं। हमें मिलकर काम
करना चाहिए। जलवायु परिवर्तन, गरीबी और असमानता के खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ें। मैक्रों
सेंटरिस्ट और वृहत यूरोपवादी नेता हैं और वे जिस समारोह में अपने विचार व्यक्त कर
रहे थे, उसमें 60 देशों के राष्ट्राध्यक्ष मौजूद थे। इनमें डोनाल्ड ट्रम्प और
व्लादिमीर पुतिन भी थे।
राष्ट्रवाद,
देशभक्ति और वैश्वीकरण के वात्याचक्र में दुनिया फिर घिरती जा रही है। मैक्रों के
विचारों पर एक अलग बहस चल निकली है, पर पिछले हफ्ते ब्रिटेन से व्यवहारिक राजनीति
से जुड़ी कुछ खबरें बाहर निकली हैं, जो इस बहस का हिस्सा बनेंगी या बन रहीं हैं।
यह बहस है यूरोप के एकीकरण बनाम ब्रेक्जिट की। यूरोप का एकीकरण ब्रिटिश राजनीति
में बहस का विषय है, खासतौर से सत्तारूढ़ गठबंधन की सबसे बड़ी कंजर्वेटिव पार्टी
के भीतर इस विषय को लेकर गहरे अंतर्विरोध है। दो साल पहले ब्रिटेन की जनता ने जनमत
संग्रह में यूरोपीय यूनियन से अलग होने के पक्ष में फैसला किया था। इसे ब्रेक्जिट
कहते हैं। अब जैसे-जैसे ब्रेक्जिट के दिन करीब आ रहे हैं, जटिलताएं बढ़ रही हैं। यूरोपीय यूनियन से अलग होने की शर्तों को लेकर
विवाद है।
