इस साल नेपाल,
पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और मालदीव में हुए चुनावों के बाद इस हफ्ते बांग्लादेश की
संसद के चुनाव होने जा रहे हैं। मतदाता 30 दिसम्बर को 350 सदस्यों वाली 11वीं संसद
के सदस्यों को चुनेंगे। इन सदस्यों में से 300 सीधे फर्स्ट पास्ट द पोस्ट की
पद्धति से चुने जाएंगे। 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जिनका चुनाव
पार्टियों को प्राप्त वोटों के अनुपात में किया जाएगा। बांग्लादेश हमारे उन पड़ोसी
देशों में से एक है, जिनके साथ हमारे रिश्ते पिछले एक दशक से अच्छे चल रहे हैं।
इसकी बड़ी वजह शेख हसीना के नेतृत्व में अवामी लीग की सरकार है।
अवामी लीग की सरकार
ने भारत के पूर्वोत्तर में चल रही देश-विरोधी गतिविधियों पर रोक लगाने में काफी
मदद की है। दूसरी तरफ भारत ने भी शेख हसीना के खिलाफ हो रही साजिशों को उजागर करने
और उन्हें रोकने में मदद की है। शायद इन्हीं कारणों से जब 2014 के चुनाव हो रहे थे, तब भारत ने उन चुनावों में दिलचस्पी दिखाई
थी और हमारी तत्कालीन विदेश सचिव सुजाता सिंह ढाका गईं थीं। उस चुनाव में खालिदा
जिया के मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने चुनाव का बहिष्कार किया
था। इस वजह से दुनिया के कई देश उस चुनाव की आलोचना कर रहे थे।

