शनिवार 4 मई को
इसराइली सेना ने गज़ा
पट्टी में हमस के ठिकानों पर जबर्दस्त हमले किए। हाल के वर्षों में इतने बड़े हमले
इसराइल ने पहली बार किए हैं। हालांकि लड़ाई ज्यादा नहीं बढ़ी, महत्वपूर्ण
बात यह थी कि इन इसराइली हमलों में दूसरे ठिकानों के अलावा हमस के सायबर केन्द्र को निशाना बनाया गया।
हाल में हमस ने सायबर-स्पेस पर हमले बोले थे। सायबर-अटैक के खिलाफ जवाबी प्रहार का
यह दूसरा उदाहरण है। इसके पहले अगस्त 2015 में अमेरिका ने ऐसे कारनामे को अंजाम
दिया था। इस लिहाज से इसराइली हमला इतिहास की महत्वपूर्ण घटना है। अब हम
सायबर-युद्ध के और करीब पहुँच गए हैं।
अभी तक हम मानकर चल
रहे थे कि सायबर हमले केवल कम्प्यूटर सिस्टम्स को निशाना बनाते हैं। लक्ष्य होता
है शत्रु की अर्थ-व्यवस्था तथा तकनीकी सिस्टम्स को ध्वस्त करना। आमतौर पर इसे
भौतिक-युद्ध से फर्क ‘अदृश्य-युद्ध’ का अंग माना जाता
है। पर शनिवार 4 मई को इसराइली सेना ने गज़ा पट्टी में हमस के ठिकानों पर जबर्दस्त हमले किए। हाल के वर्षों
में इतने बड़े हमले इसराइल ने पहली बार किए हैं और इनमें निशाना दूसरे ठिकानों के
अलावा हमस के सायबर केन्द्र हैं। इन केन्द्रों से हाल में हमस ने इसराइल के सायबर-स्पेस
पर हमले बोले थे। सायबर-वार के खिलाफ जवाबी प्रहार का यह दूसरा उदाहरण है। इसके
पहले सन 2015 में अमेरिका ने ऐसे कारनामे को अंजाम दिया था।
मनुष्य
जाति का अस्तित्व प्रकृति के साथ युद्ध करते-करते कायम हुआ है। मानवता का इतिहास,
युद्धों का इतिहास है। युद्ध की तकनीक और उपकरण बदलते रहे हैं। तीन साल पहले नेटो
ने घोषित किया था कि भविष्य की लड़ाइयों का मैदान ‘सायबर स्पेस’ होगा। इस लिहाज से शनिवार को हुआ इसराइली हमला
इतिहास की महत्वपूर्ण घटना है। अब हम
सायबर-युद्ध के और करीब पहुँच गए हैं। इसराइली रक्षा-विशेषज्ञों का दावा है कि हाल
में हमस ने इसराइल पर सायबर हमला बोला था, जिसमें वे विफल रहे। इसके जवाब में हमने
हमस के सायबर केन्द्र को तबाह कर दिया है।
इसराइल
ने इस बात का ज्यादा विवरण नहीं दिया है कि हमस ने सायबर हमला कब और किस तरह से
किया, पर यह साफ कहा कि यह सायबर हमला था, जिसका जवाब हमने हवाई हमले से किया। इसराइल
के इस हमले में खुफिया एजेंसी ‘शिन बेट’ भी शामिल थी, जिसे इसराइल की अदृश्य एजेंसी माना जाता है। अगस्त 2015
में अमेरिका ने ब्रिटिश नागरिक जुनैद हुसेन की हत्या के लिए सीरिया के रक्का में ड्रोन
हमला किया था। जुनैद हुसेन इस्लामिक स्टेट का सायबर एक्सपर्ट था, जिसने अमेरिका
सेना के कुछ भेद ऑनलाइन उजागर कर दिए थे। माना जाता है कि वह सायबर वॉर की शुरुआत
थी। इसराइल और हमस के बीच लगातार चल रहे रॉकेट युद्ध के बीच के बीच इस परिघटना से
भावी युद्धों के संकेत मिलने लगे हैं।
