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मंगलवार, 25 दिसंबर 2018

बांग्लादेश में संसदीय चुनाव


पड़ोसी देशों की राजनीति भारत के साथ उनके रिश्तों को काफी प्रभावित करती है। इस साल नेपाल, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और मालदीव के चुनावों के बाद इस हफ्ते बांग्लादेश की संसद के चुनाव होने जा रहे हैं। बांग्लादेश हमारे उन पड़ोसी देशों में से एक है, जिनके साथ हमारे रिश्ते पिछले एक दशक से अच्छे चल रहे हैं। इसकी बड़ी वजह शेख हसीना के नेतृत्व में अवामी लीग की सरकार है। शेख हसीना को अपने देश में कट्टरपंथी समूहों का सामना करना पड़ता है, जो स्वाभाविक रूप से पाकिस्तान-परस्त भी हैं। इसलिए भारत के साथ उनके हित जुड़ते हैं। इस वजह से उनपर भारत के पिट्ठू होने का आरोप भी लगता है।

अवामी लीग की सरकार ने भारत के पूर्वोत्तर में चल रही देश-विरोधी गतिविधियों पर रोक लगाने में काफी मदद की है। दूसरी तरफ भारत ने भी शेख हसीना के खिलाफ हो रही साजिशों को उजागर करने और उन्हें रोकने में मदद की है। शायद इन्हीं कारणों से जब 2014 के चुनाव हो रहे थे, तब भारत ने उन चुनावों में दिलचस्पी दिखाई थी और हमारी तत्कालीन विदेश सचिव सुजाता सिंह ढाका गईं थीं। उस चुनाव में खालिदा जिया के मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने चुनाव का बहिष्कार किया था। इस वजह से दुनिया के कई देश उस चुनाव की आलोचना कर रहे थे।
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