मालदीव के संसदीय चुनाव में मालदीव डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) की भारी जीत से भारत ने संतोष की साँस ली है। मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहीम मोहम्मद सोलिह की सरकार के लिए भी यह खुशखबरी है, क्योंकि अब तमाम विधेयकों और नीति से जुड़े प्रस्तावों को संसद से मंजूरी मिलने में आसानी होगी। सितम्बर 2018 में हुए चुनाव में जीतने के बाद से राष्ट्रपति सोलिह का ध्यान देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने और चीनी कर्जे के दबाव से बाहर निकालने में है। भारत की दिलचस्पी हिन्द महासागर में अपनी सुरक्षा को मजबूत बनाने में है। मालदीव में मित्र-प्रशासनिक व्यवस्था के आने से बेहतर और क्या हो सकता है।
पिछले साल हुए राष्ट्रपति पद के चुनावों में पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन की पराजय के बाद भी अंदेशा इस बात का था कि कहीं संसदीय चुनाव में ऐसी स्थिति पैदा न हो जाए कि देश में राजनीतिक गतिरोध पैदा होने लगे। राष्ट्रपति पद के चुनाव में कई दलों ने मिलकर मोर्चा बनाकर अब्दुल्ला यामीन को पराजित किया था, पर इन दलों के बीच मतैक्य नहीं है और कुछ दलों की हमदर्दी अब्दुल्ला यामीन के साथ है। बहरहाल इस संसदीय चुनाव में यामीन खुद नहीं उतरे थे। उनकी पार्टी प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ मालदीव ने अपने प्रत्याशी उतारे थे, पर उनकी भारी पराजय हुई। पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नाशीद को भारी जीत मिली।
पिछले साल हुए राष्ट्रपति पद के चुनावों में पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन की पराजय के बाद भी अंदेशा इस बात का था कि कहीं संसदीय चुनाव में ऐसी स्थिति पैदा न हो जाए कि देश में राजनीतिक गतिरोध पैदा होने लगे। राष्ट्रपति पद के चुनाव में कई दलों ने मिलकर मोर्चा बनाकर अब्दुल्ला यामीन को पराजित किया था, पर इन दलों के बीच मतैक्य नहीं है और कुछ दलों की हमदर्दी अब्दुल्ला यामीन के साथ है। बहरहाल इस संसदीय चुनाव में यामीन खुद नहीं उतरे थे। उनकी पार्टी प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ मालदीव ने अपने प्रत्याशी उतारे थे, पर उनकी भारी पराजय हुई। पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नाशीद को भारी जीत मिली।

