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बुधवार, 24 अप्रैल 2019

सऊदी शहज़ादे की यात्रा और एशिया का बदलता सीन


परम्पराओं को तोड़कर शहज़ादे मोहम्मद बिन सलमान का स्वागत करने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हवाई अड्डे जाना हाल में सुर्खियों में था। पर सऊदी अरब का ज़िक्र पिछले दिनों कुछ और बातों के लिए भी हुआ। सऊदी अरब का आधुनिकीकरण, उसकी विदेश-नीति और अर्थ-व्यवस्था में बदलाव अब दुनिया की दिलचस्पी के नए विषय हैं। पत्रकार जमाल खाशोज्जी की हत्या का प्रसंग सामने आने के कारण कुछ समय के लिए उसके आधुनिकीकरण की खबरें पीछे चली गईं थीं। हाल में एशिया के तीन महत्वपूर्ण देशों में एमबीएस यानी क्राउन प्रिंस के दौरे के बाद सऊदी अरब फिर से खबरों में है।
माना जा रहा है कि सऊदी अरब की दिलचस्पी एशिया के पुनर्जागरण में  है और भविष्य के पूँजी निवेश और कारोबार के लिए वह अपने नए साझीदारों को खोज रहा है। साथ ही वह अपने नए चेहरे को दुनिया के सामने पेश करना चाहता है। नवीनतम समाचार यह है कि सऊदी अरब ने पहली बार एक महिला को अमेरिका में राजदूत नियुक्त किया है। पत्रकार जमाल खाशोज्जी की हत्या के बाद अमेरिका के साथ उसके रिश्तों में खलिश आ गई है, शायद उसे दुरुस्त करने और सऊदी अरब को नई रोशनी में दुनिया के सामने पेश करने के इरादे से यह फैसला किया गया है। दिसम्बर में अमेरिकी सीनेट ने खाशोज्जी की हत्या के सिलसिले में क्राउन प्रिंस की भर्त्सना की थी।

शनिवार, 24 नवंबर 2018

खाशोज्जी-हत्या में क्राउन प्रिंस पर संदेह का घेरा


पश्चिम एशिया में इसरायल के बाद सऊदी अरब ऐसा देश है, जिसे अमेरिका का सबसे करीबी माना जाता है। पर इधर पत्रकार जमाल खाशोज्जी की हत्या की जुड़ती कड़ियों के कारण कई तरह के असमंजस उसके सामने खड़े हो रहे हैं। पिछले हफ्ते सीआईए की एक रिपोर्ट में कहा गया कि इस हत्या की जानकारी सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान को थी। ट्रम्प प्रशासन ने इस रिपोर्ट की अनदेखी कर दी है, पर मामला दब नहीं रहा है। सीनेट की विदेश सम्बंध समिति के अध्यक्ष बॉब कॉर्कर ने अपने ट्वीट में कहा है, इस हत्या के आरोप में क्राउन प्रिंस किसी को मौत की सज़ा दें, उसके पहले ट्रम्प प्रशासन को अपनी राय व्यक्त करनी चाहिए।

इतना ही नहीं सीनेटर एड मार्की ने ट्रम्प प्रशासन से माँग की है कि सऊदी अरब के साथ सिविल न्यूक्लियर सहयोग की वार्ता बंद करें और उसे नाभिकीय रिएक्टर बेचने की योजना पर रोक लगाएं। व्यक्तिगत रूप से ट्रम्प के सऊदी राजघराने से अच्छे रिश्ते हैं। अमेरिका ने सऊदी नीतियों की आलोचना नहीं की है, पर अमेरिका की संसद यमन में सऊदी सैनिक हस्तक्षेप और अब खाशोज्जी की हत्या के सवाल पर परोक्ष रूप से अपनी चिंता व्यक्त कर रही है।
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